Sunday, January 2, 2011

पटरी से उतरता एक बादशाह .


नए साल के पहले रविवार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पहले पेज पर फुल पेज का विज्ञापन छपा . यह विज्ञापन था शाहरुख की आने वाली फिल्म रा -वन का. इस में शाहरुख अपनी चिर परिचित मुद्रा में थे . अकड़े हुए . सपाट चेहरा , भाव ऐसे कि '' में किसी कि परवाह नहीं करता '' . अकड़और अहंकार शाहरुख के चरित्र के अहम् हिस्सा बन गए है. हो सकता है रा-वन में उनका किरदार ही भावनाहीन मशीन का हो , परन्तु उनके पिछले सालो के स्वभाव पर नजर डाले तो उनकी छवि सहज सरल अभिनेता की कभी नहीं रही है.

नब्बे के दशक से शाहरुख़ ने सफलता का स्वाद चखना शुरू किया. उनकी फिल्मे बॉक्स ऑफिस पर धन बरसाने लगी .भारत ही नहीं वरन ओवेर्सिस में भी उनकी फिल्मो ने कमाल का व्यवसाय करना शुरू किया . हिंदी सिनेमा में वे पहले सितारे बने जिसकी फिल्मे विदेशो में सबसे ज्यादा कमाई करने लगी , बस यही पर मीडिया ने उन्हें ' बादशाह खान ' से नवाज दिया और इस लेबल ने शाहरुख खान का दिमाग सातवे आसमान पर पहुचा दिया. बडबोला पण उन पर हावी होने लगा और उन्होंने अपने समकालीन अभिनेताओं और सीनियर पर टिपण्णी कर आहत करना शुरू किया. नए साल के मोके पर ब्रिटेन के एक अखबार ने दस घमंडी खिलाडियों की सूची जारी की है. जिसमे हमारे यूवराज सिंह भी शामिल है. ऐसी ही कोई सूची फिल्म अभिनेताओं की बनेगी तो निश्चित तौर पर उसमे शाहरुख पहले पांच में शामिल होंगे.

समकालीन खान अभिनेताओं से उनका पंगा जग जाहिर है . सलमान और आमिर उनके निशाने पर हमेशा से रहे है. मनोविज्ञान का सिद्धांत है कि असुरक्षा की भावना मनुष्य को आक्रमण करने को प्रेरित करती है. परन्तु आज शाहरुख़ इस मुकाम पर आगये है जहां असफलता से डर कोई मायने नहीं रखाता है .शाहरुख बड़े सितारे है परन्तु आदरणीय नहीं है.इस बात को उनके हालिया बयान ने और ज्यादा मजबूत किया है. मौका था करण जोहर के साथ काफी पीने का. यहाँ भी उन्होंने अपने अहंकार का डटकर प्रदर्शन किया और दोनों खान सितारों से दोस्ती के रास्ते बंद कर दिए.
बादशाह के आवरण में लिपटे शाहरुख को यह मानना हित में होगा कि सफलता के संकरे शिखर पर हमेशा नहीं रहा जासकता है..आज नहीं तो कल उन्हें ढलान पर आना ही होगा. और उस समय अहंकारहीन शाहरुख को ही तव्वज्जो मिलेगी जैसी एक जमाने के क्रोधित यूवक अमिताभ को आज अपनी विनम्रता के लिए सर आँखों पर बिठाया हुआ है

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