Thursday, December 30, 2010

मौकाए -वारदात से फरार हत्यारा !!


देश की राजधानी को हिला देने वाले बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड को अंततः सी.बी . आई . ने तीस माह की मशक्कत के बाद बंद कर दिया . हयारा कौन ? यह सवाल आरुशी के साथ ही पञ्च तत्व में विलीन हो गया सा लगता है..चलिए आप और हम मिलकर पता करते है आखिर मौकाए वारदात से फरार अपराधी कौन है ..
एक - वह परिवेश जिसमे आरुशी बड़ी हुई या उस जैसी लडकिया बड़ी होती है..मात्र चौदह बरस की उम्र में महानगर की लडकिया व्यस्को की तरह व्यवहार करने लगती है. टीवी और सिनेमा को हमेशा की तरह जिम्मेवार ठहराया जाना यहाँ उचित होगा.अनवरत चलने वाले कार्यक्रम अवचेतन में 'वर्जित फल ' चखने की चाह पैदा करके ही रहते है. सीधा सा फंडा है..किसी टूथ पेस्ट का विज्ञापन हो या किसी नई फिल्म का प्रोमो क्या आपको खरीदने या देखने के लिए बाध्य नहीं करता. एक बात और ...यहाँ आरुशी के चरित्र को लेकर कोई दुविधा नहीं है. महज एक प्रवृति की बात मुख्य है...बच्चो का असमय बड़ा हो जाना.
दो -आरुशी का परिवार. क्या वजह थी कि यूवा होती लड़की के परिवार में एक अधेड़ मर्द नौकर था ? आरुशी के माता पिता दोनों अपने डॉक्टर पेशे के चलते अधिकाँश समय घर से बाहर रहते थे. इस छोटी सी चुक का अहसास उन्हें कभी नहीं हुआ?
तीन -आरुशी की हत्या को राष्ट्रीय तमाशा बनाने में में हमारे न्यूज़ चेनलो ने न्यायधीश की भूमिका किसके कहने पर निभाई ? डा. राजेश के घर से सीधा प्रसारण , पड़ोसियों से नुपुर तलवार के चरित्र पर जबरन टिपण्णी , हेमराज और आरुशी के काल्पनिक संबंधो पर लम्बी बहस , डा.राजेश के सहायक को तीसरा कोण बना कर क्या हासिल हुआ ? बे - शर्म मीडिया ने कभी रुक कर सोचने की कोशिश की कि वे एक परिवार को कितना जलील कर रहे है ?
चार -'केंद्रीय जांच एजेंसी ' तमाम तरह के पुलसिया हथकंडे अपना कर क्यों कर नाकाम रही ? एक हत्या के मामले में सारे परिवार का नारको टेस्ट , लन्दन से फोरेंसिक टेस्ट , बावजूद नतीजा सिफर.....निकम्मापन अपराधी को मुक्त विचरण का अधिकार नहीं दे रहा ?
पांच -आप और हम , सुबह कि चाय के साथ अखबार पड़ने वाला सम्पूर्ण समाज, जिसके लिए यह 'आये दिन' होने वाले हादसे से ज्यादा मायने नहीं रखता था. किसी ने भी इस ह्त्या को एक आन्दोलन बनाने की कोशिश नहीं की. न तो यह लड़की अल्पसंख्यक समाज से थी न ही दलित थी , चुनावों में इसके किसी जाती विशेष के होने से फर्क पड़ता तो शायद डा. राजेश आज दिल्ली विधानसभा के सदस्य होते.
आरुशी तुम्हारा अपराधी यही कही सिगरेट फूंक कर मुस्कुरा रहा होगा....हमें माफ़ करना. तुम अकेली नही हो जिसे न्याय नहीं मिला. तुम्हारे जेसे बदनसीब और भी है इस देश में .

Tuesday, December 28, 2010

साला में तो साहब बन गया ......

इन दिनों बड़ी हर्षित अवस्था से गुजर रहा हु . सारा दिन उल्लास से गुजर रहा है . मेरी इस मनोदशा के लिए इस बात को कतई जिम्मेवार न माना जाए कि मुझे आज भी प्याज पंद्रह -बीस रूपये किलो मिल रहे है !!कहाँ से मिल रहे है यह फिलहाल राज रहने दे. मेरी ख़ुशी का ठिकाना कुछ इ मेल है, जो बिला नागा मुझे प्राप्त हो रहे है . ब्रिटेन कि एक कंपनी ने मुझे सात लाख लोगो में से सलेक्ट किया है. उनके अनुसार में बगेर कुछ किये धरे बारह लाख पोंड का हकदार हो गया हु. दूसरा इ मेल नाइजीरिया कि लड़की का है, इन मोहतरमा के परिवार में कोई नहीं बचा है. सभी लोग एक गृह युद्ध में मारे जा चुके है.बेचारी अकेली जान एक चर्च में शरण लिए हुए है. इनके पिता एक वसीयत कर गए है कि सात करोड़ डॉलर कि राशि उन्हें तभी मिलेगी जब ये ग्रजुअशन कर लेगी अब दिक्कत यह है नाइजीरिया के हालत के चलते ग्रजुअशन वहां तो हो नहीं सकता लिहाजा कालेज की पदाई भारत में होगी.इन मोहतरमा को वहां बेठे बेठे यह महसूस हो गया है कि इस समय भारत में शरीफ और भरोसा करने लायक कोई है तो वह सिर्फ में हु.इन्होने तो यह तक लिख दिया है कि इन्हें सात करोड़ डॉलर से कोई मोह नहीं है यह रकम भारत आने से पहले ही मेरे नाम करने को तेयार है.इन दोनों लोगो कि इ मेल में कई बार डीलीट कर चुका हु परन्तु इनका विश्वास मेरे प्रति कम नहीं हो रहा है. मेरी सुविधाके लिए दोनों नेमेरी कुछ व्यक्तिगत जानकारी मांगी है..बैंक अकाउंट नं, मेरा पेन नं. आदि इत्यादि .अब बताओ होगा कोई और दूसरा मेरे जेसा किस्मत वाला ?


फिलहाल तो मेरे पड़ोसियों को भी मुझ में दिलचस्पी नहीं है.अब मिलो दूर बेठा कोई अनजान, मुझ पर भरोसा कर मेरे बारे में कुछ जानना चाहता है तो क्या हर्ज है..कम्पुटर जिसने मुझे सात लाख लोगो में से सेलेक्ट किया, गलत नहीं हो सकता. एक यूवा परदेशी लड़की का दिल गलत नहीं हो सकता..जो मेरी फोटो देखे बगेर मुझे अपनी जिन्दगी का खेवनहार बना रही है. तो मित्रो यह सब आज इसलिए बता रहा हु की इतने पेसे ने मेरा दिमाग खराब नहीं किया है और फेसबुक के दोस्तों को बताना मेरा फर्ज है. अब आप चाहे तो बधाइयो का अम्बार लगा सकते है.में तो नोट गिनने की प्रेक्टिस शुरू कर रहा हु .....

Monday, December 27, 2010

उन्हें बेटा देना मौला !! वे हमें रीअक्टर देंगे !

सरकोजी दम्पति फतेहपुर सिकरी की दरगाह पर बेटे के जन्म की दुआ मांगकर फ्रांस लोट गए....सलीम चिश्ती के वारिसो ने उन्हें विश्वाश दिलाया की जल्द ही उनके घर में एक बेटे की किल्कारिया गूंजेगी [ स्मरण रहे -अपनी पहली शादियों से दोनों के यहाँ बच्चे है ].किसी भी सामजिक संघटन ने आवाज नहीं उठाई , न ही महिला संगठनो ने बेटे / बेटी के नाम पर सरकोजी मुर्दाबाद के नारे लगाए. एक बार अमिताभ बच्चन के मुह से सिर्फ इतना निकल गया था की वे एक पोते की कामना करते है....बस सारे देश को लगा था की इस 'देशद्रोह ' के लिए अमिताभ को कड़ी सजा मिलना चाहिए . बेचारे अमिताभ मिडिया के सामने पन्द्र दिन तक सफाई देते रहे थे. देखा जाए तो सारे प्रकरण में कोई बुराई नहीं है. हमें अपने देश के लिए पामाणु रीअक्टोर चाहिए जो फ्रांस हमें देगा....बदले में हमारी कोई दरगाह कार्ला ब्रूनी को वारिस अता करती है तो इससे बड़िया 'डील . नहीं हो सकती....

भाई मेरे पास माँ है !!



बरसो तक सिने प्रेमियों को लुभाने वाले शशि कपूर गंभीर बीमारी के चलते अस्पताल में भर्ती है. खबरों के युग में यह विडम्बना है की 25 दिसम्बर को जब तक अमिताभ बच्चन उनके हाल जानने नहीं गए तब तक हिंदी सिने प्रेमियों को मस्तमौला और लुभावनी शक्ल वाले इस कलाकार के बारे में कुछ पता नहीं था..बरसो पहले अपनी फिल्म ''उत्सव'' के लिए शशि कपूर ने अपना वजन बढाया था और फिर उसे कम नहीं कर पाए. यही उनकी गंभीर बीमारियों का सबब बना.
अपने ब्लॉग में अमिताभ ने शशि कपूर के साथ छोटी सी मुलाकात को विस्तार से लिखा है .
Time and tide wait for no one। They move within their designated realms, irrespective of consequence. They care not for what their consequence may generate, they move in an unstoppable rhythm, to reach a destination that we can never aspire to reach, or have no inkling of. But what they leave behind is what we bear and contend with.
'त्रिशूल ' दीवार ' सुहाग ' चोरी मेरा काम ' दो और दो पांच , जेसी फिल्मो से हमें मोह लेने वाले शशि कपूर को आज हमारी दुआओं की जरुरत है. अँधेरे में परदे पर चुनचुनाती छवियो की जिन्दगी का यह कड़वा सच है कि जेसे ही आर्क लाइट की रौशनी उन पर से हटती है दुनिया उन्हें बिसार देती है. दो दिन पूर्व ब्लेक एंड वहाईट के जमाने की सितारा अभिनेत्री 'नलिनी जयवंत' की म्रत्यु की खबर उनके रिश्तेदारों को नौकर के माध्यम से मिली...चकाचोंध से भरा फिल्म संसार वाकई डरावना है .