Wednesday, March 23, 2011

बिल गेट्स बिहार के दौरे पर .....

दुनिया के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स और उनकी पत्नी मेलिंडा गेट्स तीन दिन के भारत दौरे पर हैं.

भारत दौरे के पहले दिन गेट्स दम्पती ने स्वास्थ्य मंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद से मुलाक़ात की और देश में स्वास्थय सेवाओं को बेहतर बनाने और पोलियो तथा एड्स के उन्मूलन पर चर्चा की.

इस यात्रा के दौरान बिल और मेलिंडा गेट्स का ध्यान बिहार पर केंद्रित होगा. गेट्स दम्पती बुधवार पटना जिले के जमसौत गांव का दौरा कर वहां की स्वास्थ्य सेवाओं का जायज़ा ले रहे हैं.

बिहार का स्वास्थ्य क्षेत्र भारत के और राज्यों के मुक़ाबले बेहद कमज़ोर माना जाता है.

बिहार का हाल

मेलिंडा गेट्स ने दिल्ली में हुए एक सम्मेलन में नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य सुधार पर ज़ोर दिया.

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में 55 प्रतिशत बच्चे कुपोषण का शिकार होते हैं, और ये आंकड़ा बिहार में भी लगभग इतना ही है. इसके अलावा काला अज़ार, खसरा और टीबी जैसी बीमारियां बिहार में चरम पर हैं.

साल 2010 में बिल गेट्स ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ एक क़रार किया था, जिसके तहत राज्य में पोलियो, काला अज़ार, टीबी और कुपोषण जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए गेट्स की परोपकारी संस्था ने 8 करोड़ डॉलर की राशि प्रदान की थी.

इस भागीदारी का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में बच्चों और माताओं के मृत्यु दर में 40 प्रतिशत तक की गिरावट लाना होगा.

अपने एक दिन के बिहार दौरे के दौरान बिल और मेलिंडा गेट्स जमसौत में स्वास्थय कर्मियों और कुछ गर्भवती महिलाओं से उनके अनुभव और चुनौतियों के बारे में बातचीत करेंगें.

बिहार में मातृत्व मृत्यु दर देश में सबसे ज़्यादा है.

बिहार यात्रा के दौरान बिल गेट्स राज्य सरकार के साथ हुई 8 करोड़ डॉलर की भागीदारी की प्रगति का जायज़ा भी लेंगें.

परोपकारी संस्था बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की सह-संस्थापक मेलिंडा गेट्स ने मंगलवार को दिल्ली में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए नवजात शिशुओं और माताओं के स्वास्थ्य सुधार पर ज़ोर दिया.

मेलिंडा का कहना था कि बेहतर तकनीक के इस्तेमाल और उसके सस्तीकरण से भारत में माताओं और नवजात शिशुओं का जीवन बचाया जा सकता है.

दशक टीकाकरण

बिल गेट्स ने इस दशक को ‘टीकाकरण के दशक’ का नाम दिया है

बिल गेट्स ने इस दशक को ‘टीकाकरण के दशक’ का नाम दिया है जिसके ज़रिए विश्व भर में खसरा, पोलियो और हैजा जैसी बीमारियों से लड़ने के लिए बच्चों को टीके लगाए जाएंगें.

साथ ही इस साल बिल गेट्स का ध्यान पोलियो को जड़ से ख़त्म करना होगा.

भारत सरकार ने पोलियो उन्मूलन मुहिम में पिछले दो सालों में अच्छी प्रगति दर्ज की है. जहां 2009 में भारत में 714 पोलियो के केस थे, वहीं 2010 में पाया गया कि भारत में केवल 41 पोलियो के केस बचे हैं.

ग़ौरतलब है कि बिहार में पिछले छह महीनों में एक भी पोलियो का केस सामने नहीं आया है. हांलाकि काला अज़ार, टीबी, खसरा और मलेरिया के आंकड़ों में ऐसी प्रगति देखने को नहीं मिली है.

पोलियो उन्मूलन मुहिम

पोलियो उन्मूलन के लिए गेट्स फाउंडेशन, रोटरी इंटरनैश्नल और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाएं मिलकर एक मुहिम चला रही हैं.

विश्व भर में पोलियो के कुछ 1300 के क़रीब केस हैं, और ये केस केवल भारत, पाकिस्तान, अफ्ग़ानिस्तान और नाइजीरिया में पाए गए हैं.

विश्व भर में पोलियो का 99 प्रतिशत खात्मा हो चुका है और आख़िरी 1 प्रतिशत को जड़ से मिटाने के लिए गेट्स फाउंडेशन, रोटरी इंटरनैश्नल और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संस्थाएं मिलकर एक मुहिम चला रही हैं.

अगर पोलियो को अगले कुछ सालों में जड़ से ख़त्म कर देने में कामयाबी हासिल होती है, तो चेचक के बाद ये दूसरी बीमारी होगी जो विश्व भर से हमेशा के लिए मिट जाएगी.

विश्व टीबी दिवस यानि 24 मार्च को बिल गेट्स दिल्ली के लाला रामस्वरुप टीबी अस्पताल का दौरा करेगें, जिसके बाद वे विज्ञान और तकनीक मंत्री कपिल सिब्बल से मुलाक़ात करेंगें.

इस बैठक में बिल गेट्स टीबी के लक्षणों का जल्द पता लगाने के लिए नई तकनीक के इस्तेमाल पर चर्चा करेंगें.

भारत में हर साल क़रीब 20 लाख टीबी के केस सामने आते हैं, और आंकड़ों के अनुसार हर तीन मिनट में दो भारतीय मरीज़ टीबी की मौत का शिकार होते हैं.

गेट्स फाउंडेशन भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र के सुधार के लिए अब तक एक अरब डॉलर की राशि दे चुका है.


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Tuesday, March 8, 2011

ईच्छा मृत्यु !!

अरुणा शानबाग मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने लेखिका पिंकी वीरानी की यह अर्ज़ी नामंज़ूर कर दी कि अरुणा की हालत को देखते हुए उनकी मौत की अनुमति दी जाए.

अरुणा जिस अस्पताल में पिछले 37 साल से बिस्तर पर हैं वहाँ के डॉक्टरों और नर्सों ने इस फ़ैसले का यह कहते हुए स्वागत किया कि वे आजीवन अरुणा की देखभाल करने के लिए तैयार हैं.

अरुणा इस पर कोई प्रतिक्रिया ज़ाहिर करने की स्थिति में नहीं हैं. यानी उन्हें ज़िंदा रखने या न रखने की बहस में उनका कोई योगदान नहीं है..

अब अरुणा के दिल की हालत कौन समझे. कहते हैं हरेक को जान प्यारी होती है और कोई भी मरना नहीं चाहता.

तो साथ ही यह भी सुना है कि हे ईश्वर, ऐसी ज़िंदगी से तो मौत भली.

अरुणा किस मनोदशा से गुज़र रही हैं यह वह ही जानती हैं.

एक तरह से इच्छा मृत्यु के विरोधियों का तर्क सही है कि अगर एक बार इसकी अनुमति दे दी गई तो ऐसे मामलों का अंबार लग जाएगा और यह तय करना मुश्किल हो जाएगा कि किसमें पीड़ित व्यक्ति की सहमति है और किसमें उसके तीमारदारों का फ़ायदा.

लेकिन इसके साथ ही इस बात को भी झुठलाया नहीं जा सकता कि टर्मिनल इलनेस यानी लाइलाज बीमारी से जूझ रहे और असहनीय पीड़ा भुगत रहे रोगी को कृत्रिम मशीनों के ज़रिए जीवित रखना कितना मानवीय है.

यह एक ऐसा मामला है जिस पर लोग बोलने से कतराते हैं.

ज़रूरत है एक राष्ट्रव्यापी बहस की जिसमें सबको अपनी राय रखने का मौक़ा मिले.

Wednesday, March 2, 2011

नोबेल ?

नोबेल प्राइज मिल जाने का यह मतलब नहीं है की जिस शख्स को यह पुरूस्कार मिला है वह 'मन ' और ईमान से भी नोबेल है . बंगला देश के मोहमद युनुस जिन्हें २००६ में मैक्रो -इकोनोमिक्स में उनके प्रयोगों(ग्रामीण बेंक) के लिए इस पुरूस्कार से नवाजा गया था . अब खबर आई है कि उन्हें बेंक के प्रबंध निदेशक के पद से हटा दिया गया है .कारण महज इतना है कि उन पर करोडो रुपयों कि हेराफेरी का आरोप लगा है .

बांग्लादेश के कंद्रीय बैंक ने कहा है कि 70 वर्षीय मुहम्मद युनूस को इसलिए हटाया गया क्योंकि वे 60 साल की उम्र के बाद भी ग्रामीण बैंक के प्रबंध निदेशक बने रहे.मुहम्मद यूनुस बांग्लादेश सरकार के आलोचक रहे हैं. सरकार की अब ग्रामीण बैंक में 25 फ़ीसदी हिस्सेदारी है.