Monday, February 28, 2011

अंतिम कर्नल !!



अगर 7 जून 2011 तक गदाफी सत्ता में बने रहे तो वे 69 वसंत देख चुके होंगे .1969 में किंग इदरिस को हटा कर सत्ता काबिज करने की 41 वी वर्षगाँठ भी मना लेंगे.यह उपलब्धि उन्हें इतिहास में सबसे ज्यादा समय तक शासन करने वाले व्यक्ति के रूप स्थापित कर देगी . भले ही दुनिया उन्हें सनकी तानाशाह के नाम से पुकारे. प्रस्तुत हे उनके और उनके परिवार के बारे में कुछ जानकारी -
गद्दाफी को उंचाई से डर लगता है .पेंतीस सीडियो से ज्यादा वे चढ़ नहीं सकते .
अपनी दो (वेध ) पत्नियों से उनके आठ बच्चे है. सबसे बड़े पुत्र लीबियाई ओलिम्पिक कमिटी के चेयर मेन है. साथ ही देश की सबसे बड़ी शीतल पेय कंपनी में चालीस फीसदी की हिस्सेदारी रखते है. समय समय पर देश के टेलीग्राफ और दूरसंचार के मामले में भी उनका दबदबा चलता रहता है .अमरीका की मशहूर गायिकाओ , मरिया केरी और बेयोसी के कार्यक्रम अपने देश में कराकर लाखों डॉलर फूंक चके है.
एक बेटी ने कानून की पदाई की है और काफी समय तक सद्दाम हुसैन की सुरक्षा सलाहकार रह चुकी है . फिलहाल सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर है. जर्मन अभिनेत्री क्लाडिया शिफर से उनकी शक्ल मिलती जुलती. यूरोप में उनकी खुद की काफी जान पहचान हे. लिहाजा अपने पिता को विदेशी मामलो में मशवरा देती रहती है . अपने पिता की लाडली संतान है .
गद्दाफी की सुरक्षा का जिम्मा चालीस यूवा महिलाओ का दस्ता सम्हालता है . सभी की उम्र पच्चीस से तीस के बीच है. इनका चुनाव बाकायदा दो साल के कड़े कालेज प्रशिक्षण के बाद किया जाता है. अधिकाँश महिलाए यूक्रेन , ब्रिटेन , और जर्मनी की है. इन्हें मरने-मारने
की शपथ दिला कर ही सुरक्षा की जवाबदारी सोंपी जाती है .
गद्दाफी को समुद्र से भी डर लगता है. उनकी अधिकाँश हवाई यात्राए जमीन के ऊपर वाले इलाके से हो कर ही गुजरती है. अगर समुद्र के ऊपर से गुजरना भी पड़े तो ऐसा रूट तय किया जाता है जब आठ घंटे से ज्यादा हवाई जहाज को समुद्र के ऊपर न रहना पड़े .
गद्दाफी की निजी सहायिका युक्रेन निवासी' गलीना कोलोत्निसका ' जिसके बारे में विकिलीक्स ने अपने केबल में लिखा था- गद्दाफी भूरे बालों वाली लड़की से प्रेम करते है, हाल ही में ब्रिटिश एयरवेज के विमान से स्वदेश लोटती देखी गई थी .
उडती उडती खबर - गद्दाफी ने इंग्लॅण्ड के एक बेंक में 21878 करोड़ डॉलर जमा कराये है और सोने के बिस्किट से लदा एक विमान जिम्बाब्वे भेजा है . वंहा के तानाशाह शासक रॉबर्ट मुगाबे गद्दाफी के परम मित्र है . एक दफे इन दोनों ने सारे अफ़्रीकी देशों को मिलाकर 'एक अफ़्रीकी 'राष्ट्र बनाने का सपना देखा था . जिसमे मुगाबे को प्रधानमंत्री बनना था और गद्दाफी को राष्ट्रपति .

Thursday, February 24, 2011

क्या हमारी तरफ ध्यान देंगे मि. टेड टर्नर ?


मुझे आश्चर्य है कि टेड टर्नर को भारत में अपनी -सिर्फ क्लासिक 'ब्लेक एंड व्हाइट फिल्म दिखने वाली चेनल TNT के भारतीय संस्करण को लांच करने का ख्याल अभी तक क्यों नहीं आया ? टेड टर्नर 'टाइम वार्नर इंक' CNN न्यूज चेनल, और 'वार्नर ब्रदर ' के भी मालिक है. यूँ तो TNT पिछले पंद्रह सालो से भारत में(अमेरिकन क्लासिक)फिल्मे प्रसारित कर रहा है, परन्तु जिस तरह से उन्होंने TNT के 'स्पेनिश ' और 'तुर्की' संस्करण जारी किये है और कई यूरोपीयन संस्करणों पर काम जारी है वेसी ही गुंजाइश भारत में भी है .
भारत में प्रति वर्ष एक हजार से ज्यादा फिल्मे बनती है और पहली बोलती फिल्म आलम -आरा से लेकर 'ब्लेक एंड व्हाइट फिल्मो के पुरे दौर में बेहतरीन क्लासिक और यादगार फिल्मे बनी है.परन्तु उचित रख रखाव के आभाव में अधिकाँश फिल्मो के प्रिंट नष्ट होने का कगार पर है. फिल्मो के प्रिंट की अधिकतम उम्र 70 -80 बरस होती है, गर उन्हें दो डिग्री सेल्सियस और चोवीस डिग्री आन्द्रता में संरक्षित किया जाए तब .
दूसरी तरफ पुराने संगीत को संरक्षित करने में ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़े है. यह काम कम खर्च में बगेर कोई आन्दोलन किये संपन्न हो रहा है. इसे सहेजने में राष्ट्रीय रेडियो स्टेशन के अलावा निजी स्टूडियो ने भी विशेष रूचि दिखाई और समय समय पर ओल्ड -इस -गोल्ड नाम से संगीत जारी कर काफी धन कमाया है .
इस तथ्य से इनकार नहीं है कि पुरानी और क्लासिक फिल्मो के प्रिंट को डिजिटल करने का काम काफी खर्चीला है , परन्तु टेड टर्नर जेसे मीडिया सम्राट के लिए यह काम आसान है.उन्होंने अमेरिका में 1939 से लेकर ब्लेक एंड व्हाईट दौर कि अधिकाँश फिल्मो को सहेज कर अपने टेलीविजन पर प्रसारित किया है और कुछ फिल्मो को रंगीन करने की आलोचना भी झेली है.
हमारे देश के प्रमुख औद्योगिक घरानों ने भी पिछले कुछ समय से फिल्मो को व्यापार के रूप में लेना शुरू किया है . अनिल अम्बानी ग्रुप , सन टीवी , आदि विशेष रूप से सक्रिय है , परन्तु इनका भी रुझान फिल्म निर्माण और फिल्मो के लिए वित्त उपलब्ध करने तक ही है .कुछ लोग अवश्य टेलीविजन चेनल शुरू कर चुके है परन्तु वे मनोरंजक चेनल और न्यूज चेनल पर ही अटके हुए है
भारत के फिल्म प्रेमी दुआ ही कर सकते है कि टेड टर्नर का ध्यान इस तरफ जाए ..या हमारे अनिल अम्बानी , सुभास चन्द्रा या दयानिधि मारन को कुछ नया करने का जूनून आये .
(टेड टर्नर की मशहूर अभिनेत्री पत्नी जेन फोंडा ने अस्सी के दशक में योग के माध्यम से अपना 'काया-कल्प ' किया था. अपना फिटनेस विडियो जारी करने वाली वे पहली स्टार थी. भारत में उनका अनुसरण कर निख़रने वाली सर्वप्रथम अभिनेत्री रेखा थी )

Monday, February 21, 2011

ओस्कर !!


ओस्कर समारोह महज एक हफ्ते दूर है. 27 फरवरी को लोस एंजल के कोडक थियेटर में होलीवूड के नाम चीन फिल्मकार रेड कारपेट पर अवतरित होंगे. यधपि ओस्कर सिर्फ अमरीकन फिल्मो को ही सम्मानित करने के लिए दिया जाता है , परन्तु सारी दुनिया टकटकी लगा कर इन पुरुस्कारों की घोषणा को अपने टेलीविजन सेट के जरिये देखती है. इस वर्ष होने वाला समारोह 83 वां होगा . चूँकि फिल्म निर्माण के हर वर्ग के लिए केटेगरी बनी हुई है , परन्तु फिर भी सबसे ज्यादा उत्सुकता 'बेस्ट फीचर फिल्म ' बेस्ट एक्टर' बेस्ट एक्ट्रेस ' को ही लेकर होती है .

ओस्कर के साथ सबसे अच्छी बात यह रही है कि इसकी विश्वश्नियता बरसो से बरकरार है. पक्षपात के आरोप न के बराबर लगे है . उसकी वजह है 5578 ओस्कर सदस्यों का निर्णायक मंडल. यह निर्णायक वोटिंग के जरिये अपनी राय ओस्कर अकादमी को बंद लिफाफों में समारोह से मात्र पांच दिन पूर्व भेजते है .

दुनिया भर कि फिल्मो को प्रोत्साहित करने के लिए 'फोरेन लंगुएज फिल्म ' की एक कटेगरी अलग से बनाई गई है. इसमें हर वर्ष मात्र चार फिल्मो को अंतिम दौर के लिए चयनित किया जाता है . विदित हो, 'लगान' अंतिम चार में जगह बनाने के बाद भी ' नो मेंस लैंड' से शिकस्त खा गई थी.


इस वर्ष अच्छी फिल्मो की दौड़ में प्रमुख है ' द किंग्स स्पीच ' सोसल नेटवर्क ' ( फेसबुक के जनक मार्क जुकेर्बेर्ग के जीवन पर आधारित ) 'इंसेप्शन ' और 'ब्लेक स्वान'. 'ब्लेक स्वान'.रूस के बेलेट डांस पर आधारित फिल्म है. उलेखनीय है कि इस फिल्म के ओस्कर जीतने की सबसे ज्यादा प्राथना रूस में हो रही. जबकि एक ज़माने रूस- अमेरिका कट्टर दुश्मन रहे है .डेनी बोयेल जिन्होंने दो बरस पहले 'स्लम डोग मिलेनियर ' के जरिये धूम मचाई थी , इस बार हेरत अंगेज फिल्म '127 अवर 'लेकर हाजिर है . इस फिल्म को भी पांच श्रेणियों में नामांकित किया गया है.


3 किलो 850 ग्राम वजनी एवं 13 .5 इंच लम्बी सोने की इस प्रतिमा का जादू कुछ ऐसा है कि दुनिया के सारे फ़िल्मी पुरूस्कार इसके सामने फीके लगते है. जिसके भी हाथ में यह जाती है उसका फ़िल्मी करियर और जिन्दगी दोनों ही सुनहरे रास्ते पर चल पड़ती है .शायद इसीलिए इसे पुरुस्कारों का पितामह कहा जाता है .




Monday, February 14, 2011

एक लड़की भीगी भागी सी..





14 फरवरी : वेलेन्ताईन डे : आज ख़ास तौर पर ऐसी अभिनेत्री को याद किया जाना चाहिए जिसके फोटो देखकर ही खालिस प्रेम की अनुभूति होती है. वह थी निर्मल सोंदर्य की देवी मधुबाला.' मुमताज जहां बेगम ' के नाम से जन्मी यह अभिनेत्री अपने ग्यारह भाई - बहनों में पांचवे स्थान पर थी. नाटको में इसका काम देखकर देविका रानी ने नाम दिया 'मधुबाला '. शायद नाम का ही कमाल था कि जीवन का पहला ब्रेक राज कपूर के साथ 'नील कमल ' में मिला उस समय उम्र थी चौदह बरस. सोलह बरस की उम्र में नायक बने अशोक कुमार फिल्म थी 'महल '. इस फिल्म से दो सितारों का जन्म हुआ. पहली तो यक़ीनन मधुबाला थी और दूसरी थी लता मंगेशकर. लता मंगेशकर के केरियर में यह फिल्म मील का पत्थर मानी जाती है .


सोंदर्य की इस मलिका का पहला प्रेम असफल रहा था. 1950 में फिल्म 'नया दौर' के निर्माण के समय एक विवाद ने वक्त की धाराए बदल दी थी. निर्माता बी . आर . चोपड़ा चाहते थे फिल्म की आउट डौर शूटिंग भोपाल में हो. फिल्म के नायक दिलीप कुमार थे नायिका मधुबाला. दोनों एक दुसरे के प्रेम में आकंठ डूबे हुए थे. लेकिन मधुबाला के अब्बा को लगता था की दिलीप कुमार के प्रभाव के कारण निर्माता जानबूझ कर फिल्म को बम्बई से बाहर शूट कर रहे है ताकि 'अकेलेपन का फायदा उठाकर मधुबाला को प्रेम जाल में फंसाया जा सके. इस गलत फहमी के चलते मधुबाला को फिल्म भी छोडनी पड़ी थी और परिवार के दबाव में आकर दिलीप कुमार को भी.......


यह भी संयोग ही था कि उस समय होलीवूड की 'मर्लिन मुनरो' मधुबाला की समकालीन थी. 'मर्लिन मुनरो' सारे जमाने को अपने सोंदर्य से चकाचोंध कर चुकी थी . तत्कालीन राष्ट्रपति जोन.ऍफ़ . केनेडी से असफल प्रेम के बाद 'मर्लिन को जीवन के नकली पन और नेराश्य के चलते आत्म हत्या करना पड़ी थी .



परन्तु नीयति ने मधुबाला के लिए कुछ और ही सोंच रखा था. दिल टूटने के साल भर अचानक पता चला था कि सुन्दरता कि इस मूर्ति के दिल में एक छेद है. उस समय यह एक ला-इलाज मर्ज था.

उम्र के 26 वे साल में मधुबाला को इस जान लेवा बिमारी ने घेरा था और अगले दस साल तक वह मौत को धकेलती रही थी. अपने 36 वे जन्म दिन के ठीक नौ दिन बाद मधुबाला दिल की बिमारी से हार गयी .

एक और विडम्बना - सन 2008 में भारत सरकार ने मधुबाला की याद में डाक टिकिट जारी किया था. परन्तु बांद्रा के जिस कब्रिस्तान में मधुबाला को 1969 में संगमरमर की कब्र में दफनाया गया था उसे 2010 में पुनर्निर्माण के कारण वंहा से हटा दिया गया.आज दावे के साथ कोई नहीं कह सकता की मधुबाला किस जगह दफ़न है.


Thursday, February 10, 2011

वो रहने वाली ब्रिटेन की


पश्चिम में जीवित लोकप्रिय और प्रसिद्ध व्यक्तियों के जीवन पर फिल्म बनाने की सफल परंपरा रही है. इसी कड़ी में ब्रिटेन की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती मारग्रेट थेचर के प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान हुए(1982 ) फाकलैंड युद्ध के सत्रह दिन को आधार बनाकर "द आयरन लेडी " फिल्म पर काम शुरू हो गया है. मार्गरेट की भूमिका मशहूर अमरीकी अभिनेत्री मेरिल स्ट्रीप निभा रही है . मेरिल स्ट्रीप 1978 से लेकर 2009 तक कई अकादमी (ओस्कर )पुरूस्कार जीत चुकी है. मेरिल ने मार्गरेट के किरदार में उतरने के लिए ब्रिटेन की संसद में बैठकर प्रधानमत्री के काम करने के ढंग को समझना आरम्भ कर दिया है.


हमारे देश में फिल्मकार अभी इस तरह के गंभीर और विवादस्पद विषयों से बचते रहे है . ऐसा नहीं है कि रोचक कहानिया नहीं है. हमारी पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का पूरा जीवन उतार चडाव भरा रहा है ., जो किसी भी फिल्म के रोमांचक कथानक के लिए सबसे जरुरी है. ठीक उसी तरह सोनिया गांधी का केम्ब्रिज से लेकर दस जनपथ का सफ़र कई 'सिक्वेल ' बनाने लायक मसाला उपलब्ध करा सकता है . अमरीका में बसे फिल्मकार 'जगमोहन मुंदरा,' ने इतालवी अभिनेत्री मोनिका बलूची को लेकर एक फिल्म सोनिया गांधी पर शुरू करने कि घोषणा की थी ...फिल्म कब शुरू होगी किसी को पता नहीं है. विदित हो कि जगमोहन मुंदरा कि छवि कामसूत्रीय फिल्म ' डिवाइन लवर्स ' जेसी फिल्मो के निर्माता की रही है.

भारत में सेंसर बोर्ड के समानांतर भी एक सेंसर बोर्ड काम करता है . कभी यह भगवा की शक्ल में सामने आता है , कभी खादी में और और कभी शिव सेना के रूप में. यही कारण है की स्वतंत्र फिल्मकार चाह कर भी इस दिशा में सोंच नहीं पाता है .

बहरहाल,एक समय किवदंती रही मार्गरेट थेचर को रुपहले परदे पर देखना इतिहास की सुहानी यात्रा जेसा रहेगा. यह बात और कि एक समय कि लोह महिला आज स्मरण शक्ति लगभग खो चुकी है, और अपनी बेटी कि देखरेख में गुमनाम जिन्दगी जी रही है .